प्राथमिक शाला तिम्मापुरम-2 के नव-निर्मित भवन में भारी अनियमितताओं का आरोप, छत में दरारें और कमरों में टपक रहा पानी।

प्राथमिक शाला तिम्मापुरम-2 के नव-निर्मित भवन में भारी अनियमितताओं का आरोप, छत में दरारें और कमरों में टपक रहा पानी।
संवाददाता, बालक राम यादव
सुकमा। जिले के विकासखंड कोंटा अंतर्गत ग्राम तिम्मापुरम-2 स्थित नव-निर्मित प्राथमिक शाला भवन की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। दुर्गेश राय ने आरोप लगाया है कि स्कूल भवन का निर्माण बिना निर्धारित मानकों और गुणवत्तापूर्ण सामग्री के किया गया, जिसके कारण भवन निर्माण के कुछ ही समय बाद छत में दरारें दिखाई देने लगी हैं और सभी कमरों में बारिश का पानी टपक रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार भवन की स्लैब पूरी तरह झूलती हुई प्रतीत होती है, जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है। इसके अलावा भवन की दीवारों में भी जगह-जगह दरारें आ चुकी हैं। ऐसे में इस भवन में अध्ययनरत मासूम बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों और ग्रामीणों में भारी चिंता व्याप्त है।
उन्होंने ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता की अनदेखी करते हुए निम्न स्तर की सामग्री का उपयोग किया गया। साथ ही बिना उचित निरीक्षण और तकनीकी परीक्षण के निर्माण कार्य का मूल्यांकन कर भुगतान भी कर दिया गया। उनका कहना है कि ठेकेदार, संबंधित इंजीनियर और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि शासन-प्रशासन लगातार क्षेत्र को नक्सलमुक्त और विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का दावा करता है, लेकिन अंदरूनी क्षेत्र होने का फायदा उठाकर निर्माण कार्यों में भारी अनियमितताएं की जा रही हैं। उनका आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी मौके पर निरीक्षण किए बिना ही निर्माण कार्यों को स्वीकृति देकर भुगतान कर देते हैं, जिससे घटिया निर्माण को बढ़ावा मिल रहा है।
स्थानीय लोगों ने यह भी बताया कि तिम्मापुरम क्षेत्र में कई बार प्रदेश के गृह मंत्री सहित जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों का दौरा हो चुका है। इसके बावजूद यदि इस प्रकार का निम्न गुणवत्ता वाला निर्माण कार्य हुआ है तो यह संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
दुर्गेश राय ने जिला प्रशासन से मांग की है कि स्कूल भवन की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए, निर्माण कार्य की गुणवत्ता का स्वतंत्र मूल्यांकन कराया जाए तथा दोषी ठेकेदार, इंजीनियर और संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए भवन को तत्काल सुरक्षित घोषित किए जाने तक वैकल्पिक व्यवस्था करने की भी मांग की गई है।
यदि समय रहते इस मामले में उचित कार्रवाई नहीं की गई तो किसी भी अप्रिय घटना की पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग और निर्माण एजेंसी की होगी।




