रात के अंधेरे में ग्रामीणों ने फावड़ा उठाकर खुद भरे जर्जर सड़क के गड्ढे, 5-6 घंटे के श्रमदान से बनाया आवागमन लायक रास्ता

रात के अंधेरे में ग्रामीणों ने फावड़ा उठाकर खुद भरे जर्जर सड़क के गड्ढे, 5-6 घंटे के श्रमदान से बनाया आवागमन लायक रास्ता
तोंगपाल–पुसपाल मार्ग पर ग्रामीणों की अनूठी पहल, व्यवस्था की सुस्ती के बीच खुद संभाली सड़क सुधारने की जिम्मेदारी
नगर संवाददाता: शंकर मिश्रा
सुकमा।
सुकमा। जिले के तोंगपाल–पुसपाल मुख्य मार्ग की बदहाल स्थिति से परेशान ग्रामीणों ने आखिरकार प्रशासन और संबंधित विभाग के इंतजार को छोड़ स्वयं फावड़ा उठा लिया। वर्षों से जर्जर हो चुकी सड़क और बारिश के कारण बने बड़े-बड़े गड्ढों से आए दिन हो रही परेशानियों के बीच ग्राम लेदाभट्टी से तोंगपाल तक ग्रामीणों ने रात के अंधेरे में सामूहिक श्रमदान कर सड़क के गड्ढों को भरने का सराहनीय प्रयास किया। करीब पांच से छह घंटे तक लगातार मेहनत कर ग्रामीणों ने सड़क को अस्थायी रूप से आवागमन योग्य बनाया।
यह मार्ग क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों के लिए जीवनरेखा माना जाता है। इसी सड़क से लोग सुकमा जिला मुख्यालय, तोंगपाल, पुसपाल और संभाग मुख्यालय जगदलपुर तक आवागमन करते हैं। लेकिन लंबे समय से सड़क की मरम्मत नहीं होने के कारण इसकी हालत बेहद खराब हो चुकी है। बारिश शुरू होते ही सड़क पर बने गहरे गड्ढों में पानी और कीचड़ भर गया, जिससे वाहन चालकों के लिए रास्ता पहचानना मुश्किल हो गया। विशेषकर रात के समय दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह मार्ग दुर्घटना का कारण बनता जा रहा है।
व्यवस्था के इंतजार से टूटा भरोसा, ग्रामीण खुद बने सड़क कर्मी
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की बदहाली को लेकर कई बार संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधियों का ध्यान आकर्षित कराया गया, लेकिन स्थिति जस की तस बनी रही। जब किसी स्तर पर सुधार की पहल नहीं हुई तो गांव के युवाओं और ग्रामीणों ने स्वयं श्रमदान करने का निर्णय लिया।
रात के समय जब अधिकांश लोग अपने घरों में थे, तब ग्रामीण फावड़ा, तसला और मिट्टी लेकर सड़क पर उतर गए। किसी ने गड्ढों में मिट्टी डाली, किसी ने पत्थर भरकर उन्हें समतल किया, तो किसी ने पूरी सड़क को चलने योग्य बनाने का कार्य किया। लगभग छह घंटे की कड़ी मेहनत के बाद सड़क के कई खतरनाक गड्ढों को भर दिया गया, जिससे लोगों को तत्काल राहत मिली।
बारिश में बढ़ जाता है हादसों का खतरा
ग्रामीणों ने बताया कि मानसून के दौरान यह सड़क सबसे अधिक खतरनाक हो जाती है। गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अनुमान नहीं लग पाता, जिससे आए दिन बाइक सवार फिसलकर घायल हो जाते हैं। कई बार चारपहिया वाहन भी गड्ढों में फंस जाते हैं। आपातकालीन स्थिति में मरीजों को अस्पताल ले जाने वाली एंबुलेंस को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क की स्थायी मरम्मत नहीं कराई गई तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है। इसलिए संबंधित विभाग को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।
ग्रामीणों की पहल बनी चर्चा का विषय
रात के अंधेरे में किए गए इस सामूहिक श्रमदान की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है। ग्रामीणों की एकजुटता और जनहित के लिए किया गया यह प्रयास अब चर्चा का विषय बन गया है। लोगों का कहना है कि यह केवल सड़क सुधारने का काम नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी और सामूहिक सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है।
इस श्रमदान में राहुल कश्यप, सुखदेव मरकाम, राजू मरकाम, नागेश नाग, चैतन मरकाम सहित कई ग्रामीणों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। सभी ने मिलकर बिना किसी सरकारी सहायता के सड़क के गड्ढों को भरने का कार्य किया।
स्थायी समाधान की मांग
ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि उनका यह प्रयास केवल अस्थायी राहत देने के लिए था। सड़क की गुणवत्तापूर्ण और स्थायी मरम्मत कराना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है। उन्होंने प्रशासन और लोक निर्माण विभाग से मांग की है कि तोंगपाल–पुसपाल मार्ग का तत्काल निरीक्षण कर व्यापक मरम्मत कार्य शुरू कराया जाए, ताकि क्षेत्र के लोगों को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके।
ग्रामीणों का कहना है कि उनका श्रमदान व्यवस्था पर सवाल भी खड़ा करता है। यदि समय पर सड़क की मरम्मत कराई जाती तो ग्रामीणों को रातभर मेहनत कर स्वयं गड्ढे भरने की नौबत नहीं आती। अब क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि प्रशासन उनकी इस पहल को गंभीरता से लेते हुए जल्द स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाएगा।




