छत्तीसगढ़

धर्म प्रचार, धर्मांतरण व प्रार्थना सभाओं पर रोक, परंपरा और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने पर जोर

धर्म प्रचार, धर्मांतरण व प्रार्थना सभाओं पर रोक, परंपरा और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने पर जोर

रिपोर्टर, बालक राम यादव
सुकमा। जिले के कोंटा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत पोलमपल्ली में आयोजित विशेष ग्राम सभा में गांव की पारंपरिक संस्कृति, सामाजिक एकता और सामुदायिक व्यवस्था को बनाए रखने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए।

सूचना पट्ट चेतावनी बोर्ड स्थापित।

ग्राम सभा के निर्णयों को सार्वजनिक करने के लिए गांव में सूचना पट्ट एवं चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं, ताकि ग्रामीणों के साथ-साथ बाहरी लोगों को भी ग्राम सभा के निर्णयों की जानकारी मिल सके।

सीमा के अंदर प्रवेश निषेध।

ग्राम सभा में ग्रामीणों ने गांव की सामाजिक एवं सांस्कृतिक पहचान पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि ग्राम सभा की पूर्व अनुमति के बिना गांव की सीमा के भीतर किसी भी प्रकार का धर्म प्रचार-प्रसार, धर्मांतरण, प्रार्थना सभा अथवा धार्मिक सभा आयोजित नहीं की जाएगी। साथ ही बाहरी व्यक्तियों, मिशनरी संस्थाओं एवं प्रचारकों के गांव में प्रवेश कर घर-घर जाकर धार्मिक प्रचार करने पर भी रोक लगाने का प्रस्ताव पारित किया गया।

गांवों में पारंपरिक रीति रिवाजों का महत्व।

ग्राम सभा ने स्पष्ट किया कि इन निर्णयों का उद्देश्य किसी विशेष धर्म या समुदाय का विरोध करना नहीं, बल्कि गांव की पारंपरिक जनजातीय संस्कृति, रीति-रिवाज, सामाजिक समरसता और आपसी भाईचारे को सुरक्षित रखना है। ग्रामीणों ने कहा कि गांव में लंबे समय से चली आ रही परंपराओं और सामाजिक व्यवस्था को बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

सूचना को उल्लंघन पर कार्रवाई।

ग्राम सभा के निर्णयों में यह भी उल्लेख किया गया कि यदि कोई व्यक्ति या संस्था इन नियमों का उल्लंघन करती है, तो इसकी सूचना संबंधित प्रशासन एवं सक्षम अधिकारियों को देकर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की जाएगी। सूचना पट्ट पर ग्राम सभा के प्रस्तावों को स्पष्ट रूप से अंकित किया गया है ताकि भविष्य में किसी प्रकार का भ्रम न रहे।

जनपद पंचायत सदस्य मुडकम भीमा ने कहा कि ग्राम सभा का मुख्य उद्देश्य गांव की परंपरा, संस्कृति और सामाजिक एकता को सुरक्षित रखना है। सूचना पट्ट के माध्यम से ग्राम सभा के निर्णयों को सार्वजनिक किया गया है ताकि प्रत्येक ग्रामीण अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक रहे। उन्होंने कहा कि गांव में शांति, सौहार्द और आपसी सम्मान की भावना को मजबूत करना प्राथमिकता है।

पेसा कानून में स्थानीय अनूसूचित क्षेत्र में विशेष महत्व।

विशेष ग्राम सभा में पेसा अधिनियम, 1996 के तहत ग्राम सभा को प्राप्त अधिकारों एवं जिम्मेदारियों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। ग्रामीणों को बताया गया कि अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा को स्थानीय परंपराओं, प्राकृतिक संसाधनों, सामाजिक व्यवस्था और सामुदायिक हितों की रक्षा के लिए विशेष अधिकार प्राप्त हैं। ग्रामीणों ने इन अधिकारों का उपयोग गांव के समग्र विकास और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए करने का संकल्प लिया।

ग्राम पंचायत द्वारा लगाए गए सूचना पट्ट के माध्यम से ग्राम सभा के निर्णय अब सार्वजनिक रूप से लागू कर दिए गए हैं। गांव के लोगों ने विश्वास जताया कि इन निर्णयों से सामाजिक एकता मजबूत होगी, पारंपरिक जनजातीय संस्कृति का संरक्षण होगा और गांव में शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखने में सहायता मिलेगी।

मुख्य बिंदु

– विशेष ग्राम सभा में सर्वसम्मति से कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित।
– ग्राम सभा की अनुमति के बिना धर्म प्रचार, धर्मांतरण एवं प्रार्थना सभाओं पर रोक।
– बाहरी प्रचारकों एवं मिशनरी गतिविधियों पर पूर्व अनुमति अनिवार्य।
– गांव की परंपरा, संस्कृति, सामाजिक सौहार्द और जनजातीय पहचान के संरक्षण पर जोर।
– पेसा अधिनियम, 1996 के तहत ग्राम सभा के अधिकारों एवं दायित्वों पर विस्तृत चर्चा।
– निर्णयों को सार्वजनिक करने के लिए गांव में सूचना पट्ट स्थापित।

– विशेष ग्राम सभा में सर्वसम्मति से कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित।
– ग्राम सभा की अनुमति के बिना धर्म प्रचार, धर्मांतरण एवं प्रार्थना सभाओं पर रोक।
– बाहरी प्रचारकों एवं मिशनरी गतिविधियों पर पूर्व अनुमति अनिवार्य।
– गांव की परंपरा, संस्कृति, सामाजिक सौहार्द और जनजातीय पहचान के संरक्षण पर जोर।
– पेसा अधिनियम, 1996 के तहत ग्राम सभा के अधिकारों एवं दायित्वों पर विस्तृत चर्चा।
– निर्णयों को सार्वजनिक करने के लिए गांव में सूचना पट्ट स्थापित।

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