छत्तीसगढ़

बड़ी खबर: पीएम राहत’ योजना से सुकमा में मिला पहला जीवनदान

‘पीएम राहत’ योजना से सुकमा में मिला पहला जीवनदान

जिला चिकित्सालय में शुरू हुआ कैशलेस इलाज, बची 30 वर्षीय देवा की जान

जिला प्रशासन, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की तत्परता आई काम

रिपोर्टर, बालक राम यादव
सुकमा। सड़क हादसों में अक्सर ‘गोल्डन ऑवर’ (दुर्घटना के बाद का पहला घंटा) ही जिंदगी और मौत के बीच का सबसे बड़ा फैसला करता है। कई बार अस्पताल पहुंचने में देरी या पैसों की तंगी मासूम जिंदगियों को छीन लेती है। इसी गंभीर चुनौती से निपटने के लिए भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा शुरू की गई महत्वाकांक्षी ‘पीएम राहत’ योजना अब सुकमा जैसे दूरस्थ और संवेदनशील जिले में भी जमीन पर उतर चुकी है। जिला प्रशासन, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की तत्परता से सुकमा जिले में इस योजना के अंतर्गत पहला सफल कैशलेस इलाज का मामला सामने आया है, जो स्वास्थ्य क्षेत्र में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है।

इस नई उम्मीद और जीवनदान की कहानी जुड़ी है 30 वर्षीय युवक कलमू देवा से, जो गादीरास थाना क्षेत्र के ग्राम पेरमा (गुफड़ी) के निवासी हैं। बीते 21 जुलाई 2026 की दोपहर रामपुरम के पास रोड में एक वाहन से गिरने के कारण देवा को गंभीर चोटें आई थीं। लहूलुहान हालत में उन्हें तत्काल 108 संजीवनी एक्सप्रेस के माध्यम से जिला अस्पताल सुकमा लाया गया। हादसे की खबर मिलते ही जिला प्रशासन सक्रिय हुआ और पीड़ित को बिना किसी कागजी या आर्थिक अड़चन के तुरंत इलाज मुहैया कराने की कवायद शुरू कर दी गई।

अस्पताल पहुंचते ही प्रशासन और स्वास्थ्य अमले ने तत्काल तालमेल बिठाया। e-DAR (इलेक्ट्रॉनिक डिटेल्ड एक्सीडेंट रिपोर्ट) पोर्टल के माध्यम से त्वरित कार्रवाई करते हुए मामले को पीएम राहत योजना के तहत पंजीकृत किया गया। गादीरास थाना प्रभारी और जांच अधिकारी इंस्पेक्टर बीरेन्द्र सिंह की मुस्तैदी से जैसे ही पोर्टल पर प्रविष्टि (e-DAR Victim ID) दर्ज हुई, स्वास्थ्य विभाग ने बिना किसी देरी के त्वरित डिजिटल अप्रूवल प्रक्रिया को पूरा किया। इस बेहतर अंतर-विभागीय समन्वय का नतीजा यह रहा कि पीड़ित कलमू देवा का पूरी तरह से निशुल्क और कैशलेस उपचार तुरंत शुरू हो गया।

योजना के तहत पीड़ित को दुर्घटना की तिथि से 7 दिनों तक प्रति व्यक्ति 1 लाख 50 हजार रुपये तक के मुफ्त इलाज की सुरक्षा मिलती है। जीवन-घातक मामलों में 48 घंटे और गैर-जीवन-घातक मामलों में 24 घंटे तक स्थिरीकरण उपचार का यह प्रावधान किसी संजीवनी से कम नहीं है। जिला सड़क सुरक्षा प्रबंधक श्री खुमेंद्र दास ने बताया कि सुकमा जिले का यह पहला मामला पूरी तरह से ‘Approved’ हो चुका है और मरीज का इलाज पूरी संवेदनशीलता के साथ जिला चिकित्सालय में जारी है, जिससे पीड़ित परिवार को इस संकट की घड़ी में बहुत बड़ा आर्थिक और मानसिक संबल मिला है।

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