सुकमा के अंतिम छोर पर ‘सुशासन तिहार’: दीपिका शोरी ने चेताया—”यह टाइमपास नहीं, ग्रामीणों का भरोसा है, संवेदनशीलता से काम करें अफसर”

सुकमा के अंतिम छोर पर ‘सुशासन तिहार’: दीपिका शोरी ने चेताया—”यह टाइमपास नहीं, ग्रामीणों का भरोसा है, संवेदनशीलता से काम करें अफसर”
सुकमा- जिले के अतिसंवेदनशील और अंतिम छोर पर बसे सिंदुरगुड़ा एवं किस्टाराम में ‘सुशासन तिहार’ और ‘बस्तर मुन्ने’ अभियान के तहत विशेष शिविर का आयोजन किया गया। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य अधिवक्ता दीपिका शोरी ने इस दुर्गम वनांचल में पहुंचकर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया और उनकी जमीनी समस्याओं को सुना।
खाट-चौपाल पर सीधा संवाद: ग्रामीणों ने रखीं मूलभूत समस्याएं
शिविर में बड़ी संख्या में पहुंचे ग्रामीणों के बीच बैठकर दीपिका शोरी ने उनकी समस्याओं को सुना। ग्रामीणों ने बिजली, कृषि, राशन और पीएम आवास जैसी मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी दिक्कतें उनके सामने रखीं। आयोग सदस्य ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना ही शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
मौके पर ही जाति-निवास प्रमाण पत्र पाकर खिले ग्रामीणों के चेहरे
इस विशेष शिविर का सबसे बड़ा लाभ यह रहा कि बरसों से सरकारी दस्तावेजों के लिए भटक रहे ग्रामीणों को मौके पर ही जन्म, जाति और निवास प्रमाण पत्र बनाकर बांटे गए। हाथों-हाथ जरूरी कागजात मिलने से ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई। साथ ही विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी भी दी गई।
पीएम आवास निर्माण में तेजी लाने की अपील
दीपिका शोरी
प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत स्वीकृत आवासों के हितग्राहियों से बात की। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे अपने पक्के मकानों का निर्माण कार्य जल्द से जल्द पूरा करें, ताकि उनके परिवारों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आ सके।
गोद भराई और अन्नप्राशन से सामाजिक सरोकार
शिविर में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा गोद भराई एवं अन्नप्राशन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। गर्भवती महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य व पोषण को लेकर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम में आयोग सदस्य ने हिस्सा लिया और विभागीय कार्यों की सराहना की।
लापरवाह अफसरों पर भड़कीं आयोग सदस्य: “सुशासन तिहार कोई मजाक नहीं…”
शिविर में जहाँ शिक्षा, स्वास्थ्य, पंचायत और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सक्रिय दिखे, वहीं खाद्य और कृषि जैसे महत्वपूर्ण विभागों के अधिकारी नदारद रहे। नए राशन कार्ड और खाद-बीज की जानकारी के लिए आए ग्रामीणों को भटकना पड़ा।
इस लापरवाही पर सख्त नाराजगी जताते हुए दीपिका शोरी ने अधिकारियों को दो टूक कहा:
”सुशासन तिहार कोई मजाक या टाइमपास का कार्यक्रम नहीं है। ग्रामीण विष्णुदेव साय सरकार पर भरोसा करके अपनी समस्याएं लेकर शिविरों में पहुंच रहे हैं। केवल उपस्थिति दर्ज कराना पर्याप्त नहीं है, संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ समस्याओं का 100% समाधान होना चाहिए।”
भरोसे की मजबूत कड़ी बना ‘सुशासन तिहार’
दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्र सिंदुरगुड़ा एवं किस्टाराम में आयोजित इस शिविर ने यह साबित किया कि सरकार अब खुद चलकर जनता के दरवाजे तक पहुंच रही है। आयोग सदस्य की सक्रियता और अनुपस्थित अधिकारियों को दी गई सख्त चेतावनी ने ग्रामीणों के भीतर शासन के प्रति विश्वास को और अधिक मजबूत किया है।




