दोरनापाल में नियमों की अनदेखी… चहेते ठेकेदारों को फायदा देने की तैयारी-बबिता माड़वी।

दोरनापाल में नियमों की अनदेखी… चहेते ठेकेदारों को फायदा देने की तैयारी-बबिता माड़वी।
रिपोर्टर बालक राम यादव
सुकमा: सुकमा जिले के दोरनापाल नगर पंचायत एक बार फिर सवालों के घेरे में खड़ी है। 13 तारीख को प्रस्तावित टेंडर प्रक्रिया 30 तारीख तक भी पूरी नहीं हो पाई है, जिससे पूरे मामले पर संदेह गहराता जा रहा है। तय समय पर टेंडर नहीं खुलना और फाइल का अब तक बंद रहना प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। यह देरी केवल एक तकनीकी चूक है या फिर इसके पीछे कोई सुनियोजित रणनीति, यह अब जांच का विषय बनता जा रहा है।
जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि नगर पंचायत में नियमों से ज्यादा रिश्तों को प्राथमिकता दी जा रही है। टेंडर प्रक्रिया में हो रही इस असामान्य देरी को लेकर यह आशंका जताई जा रही है कि कहीं किसी खास ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के लिए जानबूझकर समय तो नहीं खींचा जा रहा। यदि ऐसा है, तो यह न केवल पारदर्शिता के सिद्धांतों का उल्लंघन है, बल्कि आम जनता के विश्वास के साथ भी सीधा धोखा है।
जिम्मेदार से मामले की जानकारी लेने किया संपर्क लेकिन जिम्मेदार ने नहीं उठाया फोन
मामले की गंभीरता तब और बढ़ जाती है जब जिम्मेदार अधिकारी इस पर चुप्पी साध लेते हैं। नगर पंचायत के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। एक जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारी का इस तरह जवाब देने से बचना, लोगों के मन में संदेह को और गहरा कर रहा है। जनता जानना चाहती है कि आखिर देरी की असली वजह क्या है क्या यह महज लापरवाही है या फिर इसके पीछे कोई बड़ा खेल चल रहा है?
पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष बबिता माड़वी ने उठाए टेंडर प्रक्रिया पर सवाल
पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष बबिता माड़वी ने भी इस पूरे प्रकरण पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि टेंडर प्रक्रिया में इस तरह की देरी सामान्य नहीं हो सकती और यह किसी विशेष पक्ष को फायदा पहुंचाने की मंशा को दर्शाती है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आखिर किसके इशारे पर नियमों को दरकिनार किया जा रहा है और क्यों पारदर्शिता को नजरअंदाज किया जा रहा है।
इस पूरे मामले में सबसे चिंताजनक पहलू आने वाला बारिश का मौसम है। कुछ ही महीनों में मानसून दस्तक देगा और यदि तब तक टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तो विकास कार्य शुरू ही नहीं हो पाएंगे। बारिश के दौरान निर्माण कार्य लगभग ठप हो जाते हैं, जिससे काम महीनों तक लटक सकता है। इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा, जिन्हें बुनियादी सुविधाओं के लिए और लंबा इंतजार करना पड़ेगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर अभी भी टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता और तेजी नहीं लाई गई, तो पूरे साल के विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं। यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं होगी, बल्कि जनता के अधिकारों के साथ भी अन्याय होगा।
अब जरूरत है कि जिम्मेदार अधिकारी सामने आएं, स्पष्ट रूप से देरी के कारणों को सार्वजनिक करें और यह भरोसा दिलाएं कि प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी है। अन्यथा यह मामला न सिर्फ जांच का विषय बनेगा, बल्कि प्रशासन की साख पर भी गहरा असर डालेगा। दोरनापाल नगर पंचायत की यह चुप्पी अब सवालों के तूफान में बदल चुकी है और जनता जवाब चाहती है।




