छत्तीसगढ़

बस्तर की धरोहर, दीदियों के हाथ: ‘बस्तर पंडुम’ में घुला छिंदगढ़ की परंपराओं का मीठा स्वाद।

बस्तर की धरोहर, दीदियों के हाथ: ‘बस्तर पंडुम’ में घुला छिंदगढ़ की परंपराओं का मीठा स्वाद।

25 से अधिक पारंपरिक पेय बने आकर्षण का केंद्र, परंपराओं के संरक्षण की नई बयार

रिपोर्टर बालक राम यादव
सुकमा: बस्तर की माटी की महक, आदिम परंपराओं का गौरव और स्थानीय संस्कृति का उत्सव अब एक नए स्वरूप में पूरी दुनिया के सामने है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में आयोजित ‘बस्तर पंडुम’ केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बस्तर की आत्मा को सहेजने का एक भावुक प्रयास बन गया है। इस भव्य आयोजन में सुकमा जिले के छिंदगढ़ की दीदियां अपने साथ न केवल पारंपरिक पेय पदार्थ लेकर आई हैं, बल्कि वे उस विरासत की ध्वजवाहक बनकर उभरी हैं, जो बस्तर की पहचान है।

स्वाद में बसी परंपरा: 25 से अधिक पेय पदार्थों का संगम

संभाग स्तरीय इस महापर्व में छिंदगढ़ विकासखंड के किंदरवाड़ा पंचायत की स्व-सहायता समूह की 7 दीदियां आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। इनके स्टॉल पर बस्तर की संस्कृति का ‘अर्क’ मौजूद है। यहाँ आने वाले आगंतुक मड़िया पेज, चापड़ा आमट, लान्दा, ताड़ी, सल्फी और छिंदरस जैसे पारंपरिक पेय पदार्थों का स्वाद ले रहे हैं।

स्टॉल की खास पेशकश:
औषधीय एवं शीतल पेय

तिखुर शरबत, कोदो-कुटकी पेज और सुरम।

पारंपरिक स्वाद

चाऊर लाई पाना, धान लाई पाना और चटपटी चापड़ा चटनी।

सांस्कृतिक प्रतीक

महुआ और पसिया जैसे विरल पेय पदार्थ।

दीदियों के चेहरों पर गर्व और मुख्यमंत्री के प्रति आभार

कार्यक्रम में पहुंची रीना बेलसरिया, ज्योतिका नाग, मंजू बघेल और स्मृति बघेल के लिए यह मंच केवल व्यापार का नहीं, बल्कि सम्मान का है। समूह की सदस्य ज्योतिका नाग ने भावुक होते हुए कहा, “हमें यहाँ आकर गर्व महसूस हो रहा है। सरकार ने हमारे रहने और खाने-पीने की बेहतरीन व्यवस्था की है। अपनी संस्कृति को इस तरह सम्मानित होते देख मन खुश है। इस पहल के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का हृदय से आभार।”

विज्ञापन

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!